दिल मस्ती में लहराए, लहराने को क्या कहिए..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
दिल मस्ती में लहराए, लहराने को क्या कहिए
और ये कभी घबराए, घबराने को क्या कहिए
नागिन सी नहीं हैं जो, नागिन की तरह वो भी
हैं राहों में बलखाएं, बलखाने को क्या कहिए
दिन-रात तड़पते हैं वो बांहों में आने को
आ जाएं तो शर्माएं, शर्माने को क्या कहिए
छुप-छुप के लुभाते हैं जो दूर खड़े मुझको
गर पास वो आजाएं, आजाने को क्या कहिए
वो हुस्न पे अपने ही, अपनी ही निगाहों को
हैं डाल के इतराएं, इतराने को क्या कहिए
माशूक़ के कूचे में गर वस्ल न हो मुमकिन
तो और कहीं लग जाएं, लग जाने को क्या कहिए
मुझको मिरी जानाँ ने जाते हुए समझाया
ये दर्द-ए-जफ़ा सहना, सह जाने को क्या कहिए
जीवन की हिकायत में ख़ुशियों की शिकायत क्या
ग़म खाना ही बेहतर है, ग़म खाने को क्या कहिए
देखा न कभी तूने बीमार-ए-मोहब्बत को
मरता है 'जेहद' तेरा, मर जाने को क्या कहिए
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया
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