अपनी दुनिया जाम में है और न मयख़ाने में है..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
अपनी दुनिया जाम में है और न मयख़ाने में है
नफ़्स मतलब हर घड़ी ही अपने समझाने में है
चैन आशिक़ को न सहरा में न वीराने मेंं है
कुछ सुकूँ है भी अगर तो उसको मयख़ाने में है
भूल तू इसको न साक़ी कर 'जेहद' पर भी नज़र
आज ये भी आ गया लो प्यासा मयख़ाने में है !!
सेल्फ़ी लेकर क्या दिखाते हो मुझे तस्वीर तुम
तेरी तो तस्वीर मेरे दिल के काशाने में है !!
इश्क़ के दरबार में मिलते हैं ऐसे ही ख़िताब
इसलिए तो क़ैस भी मशहूर दीवाने में है !!
फ़स्ल-ए-गुल आएगी फिर से गर ख़िज़ाँ है दोस्तो
ये चमन बदला नहीं जो अब भी वीराने में है !!
मश्ग़ला गर ढूंढते हो दिल को बहलाने का तो
तुम मिरा क़िस्सा सुनो, हर रंग अफ़साने में है
ख़ुश्क सी ये तेरी ग़ज़लें किसको भाएंंगी 'जेहद'
दुनिया तो इस वक़्त सारी नाचने-गाने में है !!
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया
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