साक़ी मुझे दिखा दे मयख़ाना ज़िंदगी का..

      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

साक़ी मुझे दिखा दे मयख़ाना ज़िंदगी का
होने लगा है ख़ाली  पयमाना ज़िंदगी का

मय वस्ल की इनायत में देर कर न इतनी
यूँ ही छलक न जाए पयमाना ज़िंदगी का

कैसा ये दौर आया,  कैसा ये ग़म है छाया
क्यों सोज़ में है डूबा अफ़साना ज़िंदगी का

मुझको तू देखकर अब ऐ जान यूँही मत जा
तुझ पे ही मर मिटा है दीवाना ज़िंदगी का !!

किसको नहीं है उलफ़त इस ज़िंदगी से यारो
सब को ही देखता हूँ मस्ताना ज़िंदगी का !!

सजदे हज़ार हों या लाखों करें 'जेहद' हम
होगा अदा न हरगिज़ शुकराना ज़िंदगी का
               जावेेद जेेेहद
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

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