फ़िज़ा में रंग भरे, नज़र में रंग भरे..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
फ़िज़ा में रंग भरे, नज़र में रंग भरे
तिरा ही रंग-ए-सेहर जिगर में रंग भरे
तुझे जो देख सनम नज़र जिधर भी करे
तो आए बाग़ नज़र उधर में रंग भरे !!
ख़ुदाया दंग करे तिरी कमाल सिफ़त
ग़ज़ब तू बर्ग-ओ-समर, शजर में रंग भरे
मैं हर्फ़-हर्फ़ कहूँ रुबाई, गीत, ग़ज़ल
तो हर्फ़-हर्फ़ मिरी सतर में रंग भरे !
यही तो आदमी का असल में हुस्न है जी
कि अपने प्यार का बस दिगर में रंग भरे
कि भर तो देते हैं सब ग़ज़ल में रंग कई
पर उसके कैसे कोई असर में रंग भरे ?
ये दिल की रंगिनी भी रहेगी कितने दिनों
चुभेंगे ढंग कभी नज़र में रंग भरे !!
असल में हुक्मरां तो वही ही अच्छा 'जेहद'
फ़ज़ा-ए-अम्न का जो दहर में रंग भरे !!
करन सराय, सासाराम, बिहार
Comments