साक़ी है नया, ख़ुम नई, मयख़ाना नया है..

         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

साक़ी है नया, ख़ुम नई, मयख़ाना नया है
मयकश नए तो हाथ में पैमाना नया है !!

आज अपना भी अंदाज़ ये रिंदाना नया है
हर घोंट में क्या सजदा-ए-शुकराना नया है

होने को तो होती है हमेशा ही तजल्ली
पर आज तो इक जलवा जुदागाना नया है

संभलेगा दिवाना भला क्या जोश-ए-जुनूँ में
ज़ंजीर नई है न ये ज़िंदाना नया है !!

है ख़ौफ़ न हो जाए कहीं सुनके वो पागल
इतना ही भयानक मिरा अफ़साना नया है

हर वक़्त मगन रहता है वो इसलिए उसमें
है उसकी परस्तिश नई, बुतख़ाना नया है

कहते हैं मुझे देख के वो प्यार से यारो
हट जाओ नहीं ख़ैर कि दीवाना नया है

उनकी भी 'जहद' है जो अगर बोर कहानी
तो इनका भी कुछ भी नहीं अफ़साना नया है
             #जावेेद_जहद
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

Comments

Popular posts from this blog

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..