किया जिस वक़्त मैंने हाल-ए-दिल उनसे बयां अपना..

       #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

किया जिस वक़्त मैंने हाल-ए-दिल उनसे बयां अपना
तो हँस के बोले वो होता नहीं इस पर  गुमां अपना !!

यक़ीं मानो इसे तुम मेरा या मानो गुमां अपना
मैं जाते-जाते दे दूँगा तुम्हें सारा बयां अपना !!

ये धरती सारी अपनी है, ये सारा आसमां अपना
न पूछो ऐ जहाँ वालो, ठिकाना है कहाँ अपना !!

सितम होगा लगाना उस बुत-ए-बेपीर से दिल का
कभी वो दुश्मन-ए-ईमां न होगा मेहरबां अपना !!

कहीं पर जाके क्या बस जाएं अब हम सारे ही यारो
यहाँ अब छिन रहा है रोज़ ही चैन-ओ-अमां अपना

किधर जाएं तिरा दर छोड़ के मेरे ख़ुदावंदा
ज़मीनें मुझसे रूठी हैं, ख़फ़ा है आसमां अपना

हमारी शायरी अपनी है, अपनी ही ज़मीं की है
यही अपनी निशानी है, यही है अब निशां अपना

'जेहद' भर जाएंगी दुनिया में इतनी नफ़रतें इक दिन
न था इस बात पर हरगिज़ यक़ीं अपना गुमां अपना
             जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर)
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

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