किसी से लड़ी जो नज़र पहले पहले..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
किसी से लड़ी जो नज़र पहले पहले
किया उसने छलनी जिगर पहले पहले
उसी पर वफ़ाओं के बदले जफ़ा हो
जो देता है नज़राना सर पहले पहले
ये क्यों ना तबाही मचाएंगे यारो
ये आए हैं ज़ालिम इधर पहले पहले
बहुत तेज़ है एक चैनल अजब सा
जो लेता है मेरी ख़बर पहले पहले
ये अबरू, ये मिज़गाँ, ये तिरछी निगाहें
किया सबने ज़ख़्मी जिगर पहले पहले
बिगड़ के शब-ए-वस्ल उसने दुआ की
इलाही मिरी हो सहर पहले पहले !!
ये मर-मर के रचना गढ़ी है जो इतनी
बता कौन होगी अमर पहले पहले ?
वही है ज़माने में असली फ़सादी
जो छेड़े है झगड़ा बशर पहले पहले
न जाने मोहब्बत का दुनिया में यारो
लगाया था किसने शजर पहले पहले
ज़रा ग़म न करना 'जेहद' प्यार में तू
लगे चोट दिल पर अगर पहले पहले
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया
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