फ़स्ल-ए-गुल है, मौसम-ए-बरसात है..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
फ़स्ल-ए-गुल है, मौसम-ए-बरसात है
दौर में साग़र भी है, क्या बात है ।।
मेरा हमदम मेरे ही जो साथ है
ये तो बेहद हैरतों की बात है ।
हिज्र है, मैं हूँ, अँधेरी रात है
ये भी तो जी क़िस्मतों की बात है
मय पियो तो बारिशों में भीग के
अच्छी ये बरसात की सौग़ात है
दर्द-ए-आशिक़ पे हँसे जाते हो क्यों
आपके हँसने की भी क्या बात है ।
जिस जगह चाहो लड़ाओ इश्क़ तुम
ये भी क्या चोरी-छुपे की बात है ।।
लूट लो नवख़ेज़ी में सारा मज़ा
दिन मज़े का है मज़े की रात है
कौन रोकेगा किसी को इससे अब
नाच-गानों की तो अब बरसात है
लाख मैं कंगाल हूँ तो क्या हुआ
पास मेरे दौलत-ए-ख़्यालात है ।
बू-ए-ज़ुल्फ़-ए-अम्बरी का है असर
दर्द-ए-सर जो अब 'जेहद' दिन-रात है
करन सराय, सासाराम, बिहार
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