इक दिल है वो भी तेरी है दुनिया लिए हुए..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
इक दिल है वो भी तेरी है दुनिया लिए हुए
मैं जी रहा हूँ क्या यहाँ अपना लिए हुए
ये चाँद तारे झील नदी जाम, लड़कियाँ
जीती हैं कैसे बोझ ये इतना लिए हुए
वो लौट आएं न कहीं फिर से मिरी तरफ़
मुश्किल से थोड़ी बीती है रस्ता लिए हुए
कैसे मिरा भी बन गया इक कारवाँ यहाँ
मैं भी चला था ख़ुद को तो तन्हा लिए हुए
हर जा तुम्हें तो साथ में न रक्खा जाएगा
कैसे फिरूँगा मैं तुम्हें इतना लिए हुए ?
जो हो रहा है होने दो बस देखते रहो
उड़ जाएगा इसे भी ज़माना लिए हुए
कैसे मिरा भी बुझ गया चेहरा ये फूल सा
मैं तो वहाँ से आया था खिलता लिए हुए
बरहक़ 'जेहद' है मौत मगर जब भी आए ये
तो आए साथ चैन का लम्हा लिए हुए !!
करन सराय, सासाराम, बिहार
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