चुपके-चुपके कोई तुझको देखता महफ़िल में है..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
चुपके-चुपके कोई तुझको देखता महफ़िल में है
देख ले तू भी उसे गर प्यार तेरे दिल में है !!
राज़ के मानिंद पिन्हा है तुम्हारी आरज़ू
जिससे घायल होगा तू वो तीर मेरे दिल में है
हो गया अपना मुक़द्दर देखो तो कितना बुलंद
चांद पे सूरत जो थी वो आज मेरे दिल में है !!
फेर दे खंजर गले पर, करदे दो टुकड़े मुझे
ज़ब्त की ताक़त न दम भर अब तिरे बिसमिल में है
जी में आता है कि रखलें बस जिगर में घोंप के
देख कर ख़ंजर को जो ख़ंजर कफ़-ए-क़ातिल में है
कर दिया ज़ुल्फ़-ए-परेशां ने भी ये कैसा ग़ज़ब
दिल मिरा ज़ुल्फ़ों में है और ज़ुल्फ़ मेरे दिल में है
दर्द-ए-सर, दर्द-ए-जिगर और दर्द-ए-दिल है आजकल
दिल लगा के ये 'जहद' तो हाए किस मुश्किल में है !!
करन सराय, सासाराम, बिहार
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