कुछ भली आती है नज़र आशा..

      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

कुछ भली आती है नज़र आशा
कुछ बहुत ही बुरी  मगर आशा

आज टूटी थी इक मिरी उम्मीद
आज ही आई इक नज़र आशा

लम्बी-लम्बी हैं कितनी दुनिया में
और कितनी हैं मुख़्तसर आशा

एक उम्मीद पर मैं जागा था
साथ में जागी रात भर आशा

चली आती है कितनी और कितनी
रहगुज़र से गई गुज़र आशा !!

हम बिछड़ तो गए हैं उनसे मगर
कुछ इधर है तो कुछ उधर आशा

क्या हुआ, दिल में फिर बसालो नई
टूट जाए कोई अगर आशा !!

क्यों चढ़ी जाती है बुलंदी पर
गर नहीं तू सफ़ल उतर आशा

कितनी उम्मीदें छोड़ दी मैंने
दिल में तू मेरे फिर से भर आशा

आशा तो उनकी भी है मेरी भी
है मगर अपनी तो दिगर आशा

मुद्दतों में भी जो न पूरी हो
फिर तो जाएगी वो बिखर आशा

इतने सालों से क्यों तू बिखरी है
अब सँवर जा तू अब सँवर आशा

जिनकी आशाएं हैं बहुत घातक
या ख़ुदा, जाएं उनकी मर आशा

ये तिरा हो गया दिवाना 'जेहद'
कर दिया कैसा ये सेहर आशा
            जावेेद जेेेहद (जमशेद अख़्तर)
        करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

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