हो गए बर्बाद हम जिनके लिए..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
हो गए बर्बाद हम जिनके लिए
हैं ज़मीं की ख़ाक अब उनके लिए
इश्क़ में रोना पड़ेगा एक दिन
दिल दिया था क्या इसी दिन के लिए
ख़्वाब में भी अब नज़र आते नहीं
कितनी नींदें खोई थीं जिनके लिए
जाने किस दुनिया में जाकर छुप गए
जी तरसता है मिरा जिनके लिए !!
दिल मिरे अब तो तिरे दिन ना रहे
आह क्यों भरता है कमसिन के लिए
कोई भी आनंद लो तो बेहिसाब
वो भला क्या लुत्फ़ जो गिनके लिए
फिर से चहके गा चिड़ी का घोंसला
फिर वो चिड़िया जारही तिनके लिए
इश्क़ के मारे हैं जो बंदे 'जेहद'
इस ग़ज़ल को गाइए उनके लिए
करन सराय, सासाराम, बिहार
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