जुर्म से जिनके ख़ूब नाते हैं..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
जुर्म से जिनके ख़ूब नाते हैं
हम उन्हें किस लिए जिताते हैं
चीख़ते, रोते-गाते हैं कुछ लोग
और कुछ हँसके ग़म उठाते हैं
क़ीमती वोट तो हैं बस उनके
जो करोड़ों में बेचे जाते हैं !!
अच्छा सोचो तो ज़ह्न में यारो
बड़े अच्छे ख़याल आते हैं !!
महफ़िलों में बड़े-बड़े शायर
आते हैं जब तो छोटे जाते हैं
दूर तक फ़िक्र जिनकी जाती है वो
दूर की कौड़ी ख़ूब लाते हैं !!
वो हैं महफ़िल के, हम किताबों के
वो ग़ज़ल गाते, हम पढ़ाते हैं !!
इतने परमाणु बम बने हैं जो
देखिए कब तबाही लाते हैं !
जो नचाते रहे हमें अब तक
चलो अब हम उन्हें नचाते हैं
हम सुनाते हैं कितनी ही बातें
बस ख़ुशी ग़म नहीं सुनाते हैं
हम वो शायर हैं जो जहाँ में 'जहद'
बड़ी मुश्किल से पाए जाते हैं !!
करन सराय, सासाराम, बिहार
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