सितमगर सितम तो किए जारहे हैं..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
सितमगर सितम तो किए जारहे हैं
मगर हम सितम को सहे जारहे हैं
नज़र से नज़र को लड़ाएंगे वो क्या
जो आँखें चुराकर चले जारहे हैं !!
लगा कर हसीनों से दिल को इलाही
मुसीबत में हम तो फंसे जारहे हैं !!
वो आए हैं मेरी अयादत को यूँ तो
मगर मुझसे शिकवे किए जारहे हैं
मिरी मयकशी का ये आलम न पूछो
कि बेसुध ही हम तो पिए जारहे हैं !
किया है जिन्होंने हसीनों से उलफ़त
वो दर्द-ए-मोहब्बत लिए जारहे हैं !!
वो आए हैं गुलशन सजाने को यूँ तो
मगर इसको वीराँ किए जारहे हैं !!
बनाते नहीं हैं 'जेहद' हम कभी भी
ये अश्आर ख़ुद ही बने जारहे हैं !
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया
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