सारे मुजरिम जो सज़ा जुर्म की पाते जाते..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
सारे मुजरिम जो सज़ा जुर्म की पाते जाते
तो न वो ख़ाक में दुनिया को मिलाते जाते
लोग मर-मर के हैं सरकार बनाते जाते
और वो हैं कि लगातार गिराते जाते !!
सुर बदल जाते हैं अब प्यार के नग़मों के भी
काश सब एक ही सुर में इसे गाते जाते !!
आते हैं करके बड़े वादे वो जितने हम से
क्या ग़ज़ब होता अगर वादे निभाते जाते
आख़िरी वक़्त बहुत याद तुझे उसने किया
दोस्त के नाते न दुश्मन के तो नाते जाते !!
रचना लिख-लिख के छुपाने से मिला क्य तुमको
चीज़ है ये तो लुटाने की लुटाते जाते !!
कुछ हैं ऐसे भी ज़माने में जगाने वाले
जो ज़माने को तो हैं और सुलाते जाते
चाँद पर जाके जो बस जाने को बेचैन हैं वो
अपनी धरती को भी गर चाँद बनाते जाते !!
दिल न जलता मिरा न मेरी तमन्ना मरती
वो मिरे प्यार की गर आग बुझाते जाते !
तब तुम्हें सबका मसीहा सही माना जाता
जब 'जेहद' सबका ही तुम साथ निभाते जाते
चोट लगते ही ज़माना तो सिसक उठता है
सब यूँ ही कहते हैं, हम ग़म तो उठाते जाते
दंगा होता न कहीं लाशें गिराई जातीं
सब जो नफ़रत की अगर आग बुझाते जाते
ख़ुद भी हँसते थे, हमें भी जो हँसाते थे बहुत
काश जाते हुए न हमको रुलाते जाते !!
ये कहाँ तख़्त पे तुम आके 'जेहद' बैठ गए
तुम तो थे ख़ाक नशीं, ख़ाक उड़ाते जाते !!
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया
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