इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन
इनके दिलों में फूल वफ़ा के खिलाए कौन ?
आते नहीं गिरफ़्त में ये तो असानी से
इन दिलवरों को राह पे लाए तो लाए कौन
माना बला की शोख़ी है उनकी अदाओं में
पर उस नदी की मौज में हरदम नहाए कौन
जलती हुई मचलती शमा से लगा के दिल
बैठे बिठाए मुफ़्त जिया को जलाए कौन
हम तो फ़िदा हैं उनके ही हुस्न-ओ-जमाल पे
इस रीत को ग़ज़ल में भला और निभाए कौन
दो लड़कियों में एक ने दिन का समय दिया
इक ने कहा कि शब को पता मेरा पाए कौन
तन्हाई, दर्द, आंसू, तड़प और रतजगे
इतने ग़म-ए-फ़िराक़ के सदमे उठाए कौन
कितने अभी हैं छाए ग़ज़ल के दयार में
अब देखिए 'जेहद' यहाँ कबतक है छाए कौन
Mob_ 9772365964
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