हो गया मालूम लाखों रंज-ओ-ग़म खाने के बाद..

         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

हो गया मालूम लाखों रंज-ओ-ग़म खाने के बाद
ज़ह्न-ओ-दिल होता है रौशन और जल जाने के बाद

कैसी-कैसी आफ़तों का सामना करना पड़ा
इक तिरे मिलने से पहले, एक मिल जाने के बाद

तेरी उलफ़त का सिला मिलता है क्या ऐ शम्मा-रू
ये बता देते हैं परवाने भी जल जाने के बाद !!

हुस्न है दो-रोज़ा इसपे कर न तू इतना घमंड
क़द्र गुल की ख़त्म हो जाती है मुरझाने के बाद

दर्द का आलम भी है और मौत का सामान भी
जल्दी क्या है, जाइए गा दम निकल जाने के बाद

ज़िंदगी से मौत को बेहतर न समझूँ क्यों भला
खाएंगी न सैकड़ों चिंताएं मर जाने के बाद !!

परदे की चीज़ों को परदे में ही रहना चाहिए
क़द्र घट जाती है उसकी परदा उठ जाने के बाद

मुझको समझाते जो थे शेर-ओ-सुख़न का क़ायदा
ख़ुद हुए हैरान वो तो मेरे समझाने के बाद !!

उनपे मरना ठीक है लेकिन 'जेहद' ये सोच ले
उम्र भर रोना पड़ेगा उनपे मर जाने के बाद !!
                #जावेेद_जेेेहद
        Mob_ 7992365964

Comments

Popular posts from this blog

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..