आरज़ू है काट ले गर्दन नज़र के सामने..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
आरज़ू है काट ले गर्दन नज़र के सामने
जान जाए ग़म नहीं रश्क-ए-क़मर के सामने
अल्ला-अल्ला किस क़दर शौक़-ए-शहादत आज है
सर झुका जाता है मेरा फ़ितनागर के सामने !!
फूल ख़ुशबू चाँद तारे झील सागर और घटा
सब धरे हैं एक जान-ए-मुख़्तसर के सामने
हमने तो क्या-क्या न चाहा, तुम नहीं माने मगर
कुछ नहीं चलती किसी की तेरे शर के सामने !
ऐ समंदर, तेरी लहरें मुझको तो भाती नहीं
उनकी मस्तानी जवानी की लहर के सामने
कोई दर भाता नहीं उनकी तो चौखट के सिवा
लगता है हर दर ही फीका उनके दर के सामने
जब ख़ुदा का क़हर नाज़िल होता है तो कोई भी
टिक नहीं पाता है उसके उस क़हर के सामने !!
सोचता हूँ मैं हमेशा ऐसा जो होता "अगर"
पर नज़र तो और ही आता "मगर" के सामने
छोटा पौधा हूँ 'जहद' रहता हूँ लेकिन शान से
ऊँचे-ऊँचे, लम्बे-लम्बे इन शजर के सामने !!
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया
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