लड़ा के आँख वो मुझसे मिरे दिल में उतर जाएं..

        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐

लड़ा के आँख वो मुझसे मिरे दिल में उतर जाएं
रहें हर वक़्त सीने में, मुझे दीवाना कर जाएं !!

ठिकाना है न आबादी में जिनका और न सहरा में
बताओ चाहने वाले वो तेरे फिर किधर जाएं ?

रुका जब दर्द का नाला नहीं महफ़िल में वो बोले
ख़लल होता है इशरत में इन्हें कह दो कि घर जाएं

इशारा चश्म-ए-उलफ़त से नहीं अबतक हुआ साक़ी
तिरी इस बज़्म से जाएं तो कैसे नौहा-गर जाएं ?

बहुत बेताब हो जाता है जब तू ऐ दिल-ए-मुज़तर
तो उस दम सोचते हैं ख़ूब है जीने से मर जाएं !!

वो नादाँ आते ही मक़तल में बोला यूँ.नज़ाकत से
जो मरने वाले हैं मुझपे वो जल्दी से सँवर जाएं !!

किया है मुश्किलों से वस्ल का वादा 'जेहद' लेकिन
लगा अंदेशा है दिल को वो फिर से न मुकर जाएं !!
           जावेेद जहद (जमशेद अख़्तर)
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

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