इक बुत को मैंने प्यार किया, हाए क्या किया..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
इक बुत को मैंने प्यार किया, हाए क्या किया
इस दिल को सोगवार किया, हाए क्या किया
कुछ पथ को यूँही पार किया, हाए क्या किया
कुछ वक़्त नष्ट यार किया, हाए क्या किया !!
थीं मुश्किलें हज़ारों तिरी राह में सनम
फिर भी तुम्हीं को प्यार किया, हाए क्या किया
निकला न दम मिरा कभी ना आए तुम इधर
मर-मर के इंतज़ार किया, हाए क्या किया !!
किस से क़रार मांगें सिवा तेरे ऐ जुनूँ
तूने ही बेक़रार किया, हाए क्या किया
लाज़िम था ज़ब्त नाला-ए-दिल बज़्म-ए-ग़ैर में
कब जाने आशकार किया, हाए क्या किया !!
दिल से मिला के दिल इसे देकर हज़ारों ग़म
दिल मेरा दाग़दार किया, हाए क्या किया !!
आके कभी भी सामने लगने न दी हवा
छुप-छुप के दिल शिकार किया, हाए क्या किया
कितनी मुसीबतों को 'जेहद' ख़ुद से मोल के
ख़ुद ही गले का हार किया, हाए क्या किया !
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया
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