शर्मीला, ख़ूबसूरत, मस्ताना ढूंढता है..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
शर्मीला, ख़ूबसूरत, मस्ताना ढूंढता है
कैसे हसीं को दिल ये दीवाना ढूंढता है
चल मयकदे में साक़ी रुत है हसीन आई
मस्ती में आज कोई मयख़ाना ढूंढता है
रहने दे बज़्म-ओ-महफ़िल ऐ शम्मा शोख़,चंचल
दीवाना तेरा अक्सर वीराना ढूंढता है !!
कल जो जहाँ रहा था मजनूँ की उलफ़तों का
बस वैसा ही जहाँ हर दीवाना ढूंढता है !!
गुम हो न जाए यूँही तेरा ये ग़म का मारा
कबसे तिरी ख़ुशी का काशाना ढूंढता है
कब कामयाब होगा मेरा 'जेहद' तसव्वुर
ये जाने किस तरह का अफ़साना ढूंढता है
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया
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