वो कौन था जो ले गया अपने नगर मुझे..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
वो कौन था जो ले गया अपने नगर मुझे
वो कौन था जो दे गया ज़ख़्म-ए-जिगर मुझे
दे कर ग़म-ए-जुदाई अबस उम्र भर मुझे
दीवाना कर गया कोई दीवाना-गर मुझे
आवारगी-ए-शौक़ कहाँ और किधर मुझे
क्यों ले चली है राह वहाँ पुर-ख़तर मुझे
दिल और दिमाग़ आज ठिकाने पे है नहीं
बेचैन कर गई है किसी की नज़र मुझे !!
कहती है उनकी तेग़-ए-जफ़ा दिल में बार बार
दें गे दुआएं कितनी ये ज़ख़्म-ए-जिगर मुझे !!
ऐ मेरे दिल के चैन ज़रा आके देखिए
सहरा में चैन है न चमन में न घर मुझे
मत आ ख़याल यार कि है वक़्त मौत का
होने दे कुछ सुकून भी दम तोड़ कर मुझे
उसने चली न चाल क़यामत की आजतक
महशर का इंतजार हुआ किस क़दर मुझे
लिक्खा था साफ़ मैंने बुरा हाल है मिरा
उसने दिया जवाब ज़हर भेज कर मुझे
डूबा रहा 'जेहद' मैं सुख़न में जो इस क़दर
दुनिया में मिल ही जाएगी कुछ तो क़दर मुझे
करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया
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