ऐ दिल दिवाने देख दुखी दिलरुबा न हो..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
ऐ दिल दिवाने देख दुखी दिलरुबा न हो
आँखें हैं फ़र्श-ए-राह वही आ रहा न हो
ऐसा भी प्यार दोस्तो किस काम का भला
मैं हूँ असीर और उन्हें कुछ भी पता न हो
देखा है इश्तियाक़ से उनका जमाल आज
उनको भी ऐसा शौक़ कभी तो हुआ न हो
पीना है गर तो देखना यारो शराब में
साक़ी के दिल जिगर का लहू भी मिला न हो
मुझको भी है ये आरज़ू ऐ जान-ए-मयकदा
पी लूँ तिरी शराब मैं, फिर और क्या न हो
उठ जाऊँ मैं यहाँ से अगर यूँ ही क्या हुआ
वो कौन है, यहाँ से जो ख़स्ता गया न हो
अज़मत-मआब, फ़िक्र-ए-जहाँ आप ही करें
मेरा है क्या कि अपना यहाँ कुछ हो या न हो
धोना है पाप मुझको भी इक अपना दोस्तो
इसके लिए कहाँ मुझे जाकर नहाना हो ?
उसकी भी मेहनतें भला किस काम की 'जेहद'
मक़बूल सारी दुनिया में जिसकी कला न हो !!
करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया
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