ये सारे जग से ख़ुशनुमा, ये सारे जग से शादमाँ..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
ये सारे जग से ख़ुशनुमा, ये सारे जग से शादमाँ
ये हर तरह के फूलों का हसीं-हसीं है गुलसिताँ
यहाँ की दिलकशी अलग, फ़ज़ा अलग, समाँ अलग
ये अपने ही तो रंग में भला लगे है हाँ जी हाँ ।।
बहुत ही दूर-दूर से यहाँ पे आते लोग हैं
कि जैसे आते पंछियाँ, यहाँ पे करने मस्तियाँ
ये देवी, देवताओं की पसंद की जगह रही
हैं कितने ख़ुशनसीब हम कि पैदा हम हुए यहाँ
हमें ये जब अज़ीज़ है, हमारी जब ये जान है
तो लूटो न इसे कभी, लुटाओ बल्कि इसपे जाँ
हो बात करते अम्न की, वतनपरस्तियों की तुम
तो बेहयाई से करो न गंदी राजनीतियाँ ।।
हमीं उजाड़ें गर इसे, बुरी ये कितनी बात है
हमीं तो हैं सुहाने से ये गुलसितां के बाग़बाँ
यहाँ कहीं हवाएँ हैं कि जितनी साफ़-सुथरी सी
यहाँ, वहाँ भी वैसी हो, जहाँ भरा है बस धुआं
ख़ुदा तिरा है लाख-लाख शुक्रिया हाँ शुक्रिया
रहा है जैसे इसपे तू , हमेशा रहना मेहरबां !!
हक़ीक़तों से तर ब तर यहाँ के सारे फ़न 'जहद'
हाँ सारी ही कलाओं का ये क़ुदरती है आशियाँ
~जावेद जहद
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