जान है तो जहान है..

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जान है तो जहान है
जाँ से ही जग में जान है

एक ऐसा जहान है
आँखें न उसको कान है

जान हो न जहान में
तो जहाँ फिर विरान है

कैसे पाए बुलंदी जग
पस्ती पर जब गुमान है

हमसे नफ़रत करे जहाँ
फिर भी अपनी तो मान है

ऐब है जब सभी में तो
सबकी ही झूठी शान है

पहले था इक वुहान अब
सारी दुनिया वुहान है !!

मौला उनकी भी खोल दे
बंद जिनकी दुकान है !!

ज़ुल्म करते हैं ख़ूब जो
अब तो उनकी ही मान है

एक ऐसा है बादशाह
जो बड़ा बेइमान है !!

होता है किसका हक़ 'जेहद'
मिलता ये किसको दान है !!

     ~जावेद जहद

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