दुनिया थोड़ा डर गई है..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
दुनिया थोड़ा डर गई है
ये न समझो मर गई है
ख़ुद को गड्ढे में गिरा के
तुमको ऊँचा कर गई है
स्वछ्य होता ही नहीं जग
गंदगी यूँ भर गई है !!
गुमरही की तेज़ आंधी
सबको अंधा कर गई है
सोच कब बदलेगी जाने
दिल में घर जो कर गई है
चीज़-ए-बाहर घर में आई
घर की शय बाहर गई है !
भावना बदले की आख़िर
काम अपना कर गई है !!
कुछ ग़लत अपनी ही हरकत
हाल ख़स्ता कर गई है !!
झूमता रहता है ये दिल
यूँ नशा वो भर गई है !
पहले मैं जिससे अड़ा था
अब वो मुझसे अड़ गई है
जबसे वो बिछड़ी है मुझसे
सारी मस्ती मर गई है !!
शायरी अब अपनी यारो
हद से ज़्यादा बढ़ गई है
पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा
सब्ज़ बारिश कर गई है
ख़्वास होगी वो यक़ीनन
बात जो घर-घर गई है !!
कोई न पूछे 'जेहद' जब
समझो रचना सड़ गई है
~जावेद जहद
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