ये न उजड़े कभी दहर दिलकश..

        ताज़ा ग़ज़ल 💐

ये न उजड़े कभी दहर दिलकश
और भी हो ये ख़ुशनज़र दिलकश

हर शहर, गाँव की मिरे मौला
शाम रंगीं रहे, सहर दिलकश

सारी दुनिया हसीं यूँ हो जाए
आए सबको ही ये नज़र दिलकश

इस जहाँ को बिगाड़ो मत यारो
मानते हो इसे अगर दिलकश !

दिलनशीं हो गई मिरी दुनिया
कर दिया तूने यूँ सेहर दिलकश

जिसका इख़लाक़ अच्छा होता है
अस्ल में है वही बशर दिलकश !

आपकी दिलकशी का क्या कहना
तन-बदन, दिल-जिगर, नज़र दिलकश

कितना दिल को सुकून देती है
बुरी ख़बरों में इक ख़बर दिलकश

कोई जितना भी हो हसीन मगर
सबको अपना लगे शहर दिलकश

हम बुरे इस क़दर हैं क्यों, जब हैं
बह्र-ओ-बर, शम्स और क़मर दिलकश

क्यों 'जहद' जाते हो जहन्नम में
छोड़ के तुम ये रहगुज़र दिलकश

       ~जावेद जहद

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