किसी के लिए दिल की धड़कन सी माँ है..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
किसी के लिए दिल की धड़कन सी माँ है
किसी के लिए एक उलझन सी माँ है !!
पड़ी रहती है जो सड़क के किनारे
वो दुनिया में कितनी अभागन सी माँ है
जली खेत की धूप में, चूल्हे में फिर
इक ऐसी भी जग में जलावन सी माँ है
उसे तो कभी भी सँवरते न देखा
वो विधवा सी है या सुहागन सी माँ है
पतोहों को उसने कभी भी न समझा
बड़ी आग घर में लगावन सी माँ है !!
हमेशा वो रोती बिलखती है रहती
वो सालों ही भर के तो सावन सी माँ है
समेटे रही सारे संसार को जो
वही अब तो ख़ुद ही विभाजन सी माँ है
जहाँ में 'जेहद' इससे अच्छा न शासक
ये सबसे ही अच्छे सुशासन सी माँ है !!
~जावेद जहद
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