विष जो फैला जा रहा है आजकल..

         ताज़ा ग़ज़ल 💐

विष जो फैला जा रहा है आजकल
सारे जग को  खा रहा है आजकल

ख़्वाब में भी जो कभी देखा नहीं
वो समाँ दिखला रहा है आजकल

जाने कब अच्छा ज़माना आएगा
दिन बुरा ही आ रहा है आजकल

सारी दुनिया दहशतों में जी रही
कोई न इतरा रहा है आजकल

लड़ रहे हैं जंग सब अब देखना
किसमें दम कितना रहा है आजकल

जग की सारी ख़ामी और नाकामी से
पर्दा उठता जा रहा है आजकल !!

पास किसके पैसा है, किसके नहीं
कैसे कोई खा रहा है आजकल !!

इतनी लम्बी बंदियों में जो मिला
काफ़ी वो सब क्या रहा है आजकल

सारा जग न जाने किस अपराध की
ये सज़ाएं पा रहा है आजकल !!

सीख लो ऐ दुनिया वालो सीख लो
कुछ सबक़ सिखला रहा है आजकल

बदनुमा ये कैसा चेहरा दुनिया का
सबको ही दिखला रहा है आजकल

आगे देखो क्या यहाँ बदले 'जेहद'
करवटें जग खा रहा है आजकल

      ~जावेद जहद

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