यहाँ, वहाँ दिल-नज़र का मंज़र..
ताज़ा ग़ज़ल
यहाँ, वहाँ दिल-नज़र का मंज़र
मोहब्बतों के सेहर का मंज़र !!
तिरी अदा तो है जैसे जानम
क़दम-क़दम पे लहर का मंज़र
हसीन ये भी लगे है कितना
ख़िज़ाँ-रसीदा शजर का मंज़र
नगर-नगर में, शहर-शहर में
डगर-डगर में ग़दर का मंज़र
तरह-तरह के ख़ुदा ये तेरे
अजब-ग़ज़ब से बशर का मंज़र
सँवर गया है या और यारो
बिगड़ गया इस दहर का मंज़र
शजर में अपने सजा रहा हूँ
हसीं-हसीं से शजर का मंज़र
छुपा-छुपा कुछ, अयाँ-अयाँ कुछ
अजब है मेरे सफ़र का मंज़र !!
बशर-बशर में 'जहद' अदावत
नज़र-नज़र में शरर का मंज़र
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