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अल्लाह रे उलफ़त में फ़ुर्क़त का सितम सहना..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 अल्लाह रे उलफ़त में फ़ुर्क़त का सितम सहना और याद में जानाँ की आँसू का मिरे बहना !! अब नज़्अ का आलम है तुम जान से ये कहना जबतक न निकल जाए दम मेरा यहीं रहना !! कर कर के सितम हमपे मश्शाक़े-सितम बोला ये दर्द-ए-मोहब्बत है लाज़िम है तुम्हें सहना !! ख़ंजर सी नज़र करके यूँ उसने मुझे देखा देखा न जिगर से फिर अपने लहू का बहना इन मस्त निगाहों को हम जाम समझते हैं आता है सनम इनमें बस डूबे हमें रहना !! बेचैन से रहते हो क्यों उनके लिए यारो वो मीत हैं मतलब के तुम उनसे अलग रहना जब हमने 'जेहद' उनसे कुछ अर्ज़ तमन्ना की वो हँसते हुए बोले आया न तुम्हें कहना !!           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

दुनिया का चेहरा हम पहचान गए..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 दुनिया का चेहरा हम पहचान गए अंदर की सारी बातें जान गए !! वक़्त से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता क़िस्मत की बात ये हम भी मान गए !! उम्मीदों पे दुनिया क़ायम है लेकिन उम्मीद लिए कितने ही शमशान गए नेताओं के मुँह से और सच्ची बात कैसे यारो बात ये उनकी मान गए शैतानों का राज है अब चारों तरफ़ दुनिया से क्या सारे इंसान गए ? जिसको मिला न कोई भी मरने वाला ख़ुद पर वो ख़ुद से ही क़ुर्बान गए !! नक़ली ख़ुशियों की चीज़ें अब आ गईं असली ख़ुशियों के सारे सामान गए !! फिर तो कोई हमसे न टकराएगा अपना दम जिस दिन हम पहचान गए अब तो हैं दुनिया में हुशयार सभी अब तो जैसे सारे ही नादान गए दिल रोता था लेकिन कितनी महफ़िल में चेहरे पर हम तो लिए मुस्कान गए !! जिसको यहाँ से प्यार नहीं था लोग वही इंग्लिशतान या तो पाकिस्तान गए   आए थे क्या क्या लेकर हम भी 'जेहद' और क्या क्या लेकर हम अरमान गए !           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

वफ़ा में भी उनकी तो मक्कारियाँ हैं..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 वफ़ा में भी उनकी तो मक्कारियाँ हैं अनोखी, निराली ये अय्यारियाँ हैं किसी ज़ुल्फ़ ने दिल हज़ारों के जकड़े ख़ुदाया ये कैसी गिरफ़्तारियाँ हैं  हुआ ज़ब्त जब दर्द दिल का न उनसे तो अब जान देने की तैयारियां हैं वफ़ा करते होंगे वो अब जाने किस से बहुत ही मुझे ये तो बेज़ारियाँ हैं अगर चे किसी को न भाए तो समझो तुम्हारी अधूरी सी फ़नकारियाँ हैं है इतना बड़ा वो तो मक्कार यारो कि उसमें भरी सारी मक्कारियाँ हैं हमें दोस्त, दुश्मन वो दोनों समझते बड़ी ही अनोखी ये अय्यारियाँ हैं 'जेहद' शायरी को न आसान समझो कि इसमें बहुत सारी दुश्वारियां हैं !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

बला का लुत्फ़ है उसके तो मुस्कुराने में..

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   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 बला का लुत्फ़ है उसके तो मुस्कुराने में अजब सी आग लगा देती है ज़माने में न छेड़ो हमको अभी तुम शराब ख़ाने में अभी तो ग़र्क़ हैं हम पीने और पिलाने में जफ़ा कशी में वो मशहूर हैं ज़माने में मज़ा है मिलता उन्हें मेरा दिल दुखाने में पड़े हो तुम जो हमें शोख़ियाँ दिखाने में लगे हैं हम भी तिरे नाज़ को उठाने में ! तुम्हारी शोख़ अदाएं, हसीन जलवे सनम बता रहे हैं कि मशहूर हो ज़माने में !! ऐ जान, ग़ुस्से में तुम तो कमाल लगती हो कि लुत्फ़ आता है मुझको तुम्हें सताने में न ज़िक्र-ए-क़ैस सुनो और न क़िस्सा-ए-फ़रहाद सुनो मिरा कि वही ग़म मिरे फ़साने में !! तुम्हारी आस में घुट जाएगा ये दम अब तो न और देर करो अब सनम तुम आने में !! हमारे ख़ून से हाथों को सुर्ख़ कर लीजे ये जान देते हैं क्यों मेंहदियाँ लगाने में ? हमारी ख़िर्मन-ए-हस्ती जलाइए जल्दी ये देर क्यों है सनम बिजलियाँ गिराने में घुसा है कोई शिकारी दरिंदा फिर शायद ये शोर होता है क्यों उनके आशियाने में ग़ज़ब है हमसे वही आज भागते हैं 'जेहद' लगे जो रहते थे हमसे किसी ज़माने में !! बहुत लुटा चुके अश्आर हम 'जहद' अबतक न आई फिर भी कमी मेरे इस ख़ज़ाने में !! ...

इश्क़ गर कामयाब हो जाए..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इश्क़ गर कामयाब हो जाए ज़िंदगी लाजवाब  हो  जाए जाम भर जाए मीठे पानी से फिर वो पानी शराब हो जाए फूल तो फूल हैं सभी लेकिन सब कहाँ से गुलाब हो जाए शोलगी उसकी इतनी भड़की है शोला छूले तो आब हो जाए !! काश मिट जाए सबकी महरूमी सबको सब दस्तयाब हो जाए !! चाँद,  तारे ज़मीं पे आ जाएं और ज़मीं माहताब हो जाए जो हुआ,  सो हुआ ज़माने में अब शुरू अच्छा बाब हो जाए आज इसकी बड़ी ज़रूरत है हर तरफ़ इंक़लाब हो जाए ! जैसे मैं हूँ सुख़न में आज 'जेहद' हर कोई कामयाब हो जाए !!              #जावेेद_जेेेहद Mob_ 9772365964

इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था बेशक वो इशारा उनका कितना ही रूहानी था अजीब था वो लेखक भी, अजीब था वो पाठक भी पढ़ता था वो शेर बहुत और लिखता ख़ूब कहानी था बेहिस था जब तक वो हर ग़म से ही आज़ाद रहा होते ही हस्सास मगर वो हर उलझन का ज्ञानी था जितना धन लुटाता था वो लूट भी लेता था उतना फिर भी ख़ुश थे लोग उससे वो भी कैसा दानी था उसने ही तो पाठ पढ़ाया दुनिया को मोहब्बत का रस्म-ए-वफ़ा में आज न कलतक कोई उसका सानी था जब तक मुझसे दूर था वो मिलने को बेताब रहा आते ही बांहों में लेकिन शर्म से पानी-पानी था ! अक्सर उसकी बातों में मैं गुम हो जाता था 'जेहद' लहजा ही उस ज़ालिम का इतना ही रूमानी था !!            #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

उसके दिल में नाचे है बस हिंदू-मुस्लिम..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 उसके दिल में नाचे है बस हिंदू-मुस्लिम वो सीखे सिखलाये है बस हिन्दू-मुस्लिम उसकी फिर बकवास सुने है क्यों ये दुनिया हर पल जब वो अलापे है बस हिंदू-मुस्लिम टुकड़े-टुकड़े देश को करके छोड़ेगा वो क़दम-क़दम पे बांटे है बस हिंदू-मुस्लिम लगता है दुनिया में और कोई धरम नहीं है हर सू क़यामत ढाए है बस हिंदू-मुस्लिम !! सारे मुद्दों को छोड़ के अब तो सियासत में इक मुद्दा ही छाए है बस हिंदू-मुस्लिम !! सारे धर्मों को जैसे कर के नज़र अंदाज़ आपस में टकराए है बस हिंदू-मुस्लिम ! ज़ह्न में मेरे कभी-कभी ये आता है 'जेहद' कितने ज़ेहन में दौड़े है बस हिंदू-मुस्लिम           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार