अल्लाह रे उलफ़त में फ़ुर्क़त का सितम सहना..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
अल्लाह रे उलफ़त में फ़ुर्क़त का सितम सहना
और याद में जानाँ की आँसू का मिरे बहना !!
अब नज़्अ का आलम है तुम जान से ये कहना
जबतक न निकल जाए दम मेरा यहीं रहना !!
कर कर के सितम हमपे मश्शाक़े-सितम बोला
ये दर्द-ए-मोहब्बत है लाज़िम है तुम्हें सहना !!
ख़ंजर सी नज़र करके यूँ उसने मुझे देखा
देखा न जिगर से फिर अपने लहू का बहना
इन मस्त निगाहों को हम जाम समझते हैं
आता है सनम इनमें बस डूबे हमें रहना !!
बेचैन से रहते हो क्यों उनके लिए यारो
वो मीत हैं मतलब के तुम उनसे अलग रहना
जब हमने 'जेहद' उनसे कुछ अर्ज़ तमन्ना की
वो हँसते हुए बोले आया न तुम्हें कहना !!
करन सराय, सासाराम, बिहार
Comments