बला का लुत्फ़ है उसके तो मुस्कुराने में..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐
बला का लुत्फ़ है उसके तो मुस्कुराने में
अजब सी आग लगा देती है ज़माने में
न छेड़ो हमको अभी तुम शराब ख़ाने में
अभी तो ग़र्क़ हैं हम पीने और पिलाने में
जफ़ा कशी में वो मशहूर हैं ज़माने में
मज़ा है मिलता उन्हें मेरा दिल दुखाने में
पड़े हो तुम जो हमें शोख़ियाँ दिखाने में
लगे हैं हम भी तिरे नाज़ को उठाने में !
तुम्हारी शोख़ अदाएं, हसीन जलवे सनम
बता रहे हैं कि मशहूर हो ज़माने में !!
ऐ जान, ग़ुस्से में तुम तो कमाल लगती हो
कि लुत्फ़ आता है मुझको तुम्हें सताने में
न ज़िक्र-ए-क़ैस सुनो और न क़िस्सा-ए-फ़रहाद
सुनो मिरा कि वही ग़म मिरे फ़साने में !!
तुम्हारी आस में घुट जाएगा ये दम अब तो
न और देर करो अब सनम तुम आने में !!
हमारे ख़ून से हाथों को सुर्ख़ कर लीजे
ये जान देते हैं क्यों मेंहदियाँ लगाने में ?
हमारी ख़िर्मन-ए-हस्ती जलाइए जल्दी
ये देर क्यों है सनम बिजलियाँ गिराने में
घुसा है कोई शिकारी दरिंदा फिर शायद
ये शोर होता है क्यों उनके आशियाने में
ग़ज़ब है हमसे वही आज भागते हैं 'जेहद'
लगे जो रहते थे हमसे किसी ज़माने में !!
बहुत लुटा चुके अश्आर हम 'जहद' अबतक
न आई फिर भी कमी मेरे इस ख़ज़ाने में !!
करन सराय, सासाराम, बिहार
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