इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था..
#ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था बेशक वो इशारा उनका कितना ही रूहानी था अजीब था वो लेखक भी, अजीब था वो पाठक भी पढ़ता था वो शेर बहुत और लिखता ख़ूब कहानी था बेहिस था जब तक वो हर ग़म से ही आज़ाद रहा होते ही हस्सास मगर वो हर उलझन का ज्ञानी था जितना धन लुटाता था वो लूट भी लेता था उतना फिर भी ख़ुश थे लोग उससे वो भी कैसा दानी था उसने ही तो पाठ पढ़ाया दुनिया को मोहब्बत का रस्म-ए-वफ़ा में आज न कलतक कोई उसका सानी था जब तक मुझसे दूर था वो मिलने को बेताब रहा आते ही बांहों में लेकिन शर्म से पानी-पानी था ! अक्सर उसकी बातों में मैं गुम हो जाता था 'जेहद' लहजा ही उस ज़ालिम का इतना ही रूमानी था !! #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार