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इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था..

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        #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इक कासे में उठ आया दरिया का सारा पानी था बेशक वो इशारा उनका कितना ही रूहानी था अजीब था वो लेखक भी, अजीब था वो पाठक भी पढ़ता था वो शेर बहुत और लिखता ख़ूब कहानी था बेहिस था जब तक वो हर ग़म से ही आज़ाद रहा होते ही हस्सास मगर वो हर उलझन का ज्ञानी था जितना धन लुटाता था वो लूट भी लेता था उतना फिर भी ख़ुश थे लोग उससे वो भी कैसा दानी था उसने ही तो पाठ पढ़ाया दुनिया को मोहब्बत का रस्म-ए-वफ़ा में आज न कलतक कोई उसका सानी था जब तक मुझसे दूर था वो मिलने को बेताब रहा आते ही बांहों में लेकिन शर्म से पानी-पानी था ! अक्सर उसकी बातों में मैं गुम हो जाता था 'जेहद' लहजा ही उस ज़ालिम का इतना ही रूमानी था !!            #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

उसके दिल में नाचे है बस हिंदू-मुस्लिम..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 उसके दिल में नाचे है बस हिंदू-मुस्लिम वो सीखे सिखलाये है बस हिन्दू-मुस्लिम उसकी फिर बकवास सुने है क्यों ये दुनिया हर पल जब वो अलापे है बस हिंदू-मुस्लिम टुकड़े-टुकड़े देश को करके छोड़ेगा वो क़दम-क़दम पे बांटे है बस हिंदू-मुस्लिम लगता है दुनिया में और कोई धरम नहीं है हर सू क़यामत ढाए है बस हिंदू-मुस्लिम !! सारे मुद्दों को छोड़ के अब तो सियासत में इक मुद्दा ही छाए है बस हिंदू-मुस्लिम !! सारे धर्मों को जैसे कर के नज़र अंदाज़ आपस में टकराए है बस हिंदू-मुस्लिम ! ज़ह्न में मेरे कभी-कभी ये आता है 'जेहद' कितने ज़ेहन में दौड़े है बस हिंदू-मुस्लिम           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

रावण सा बना फिरता है आदमी..

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   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 रावण सा बना फिरता है आदमी आदमी पे सितम करता है आदमी मस्अले भी हल करता है आदमी और उलझनें भी धरता है आदमी रखता है ये हद में ख़ुद को तो कभी हद से भी कभी गुज़रता है आदमी छूना चाहता है ये तो बुलंदियां और गिरने से भी डरता है आदमी छुक्के छुड़ाता है कभी तो दुश्मनों के कभी दोस्तों से ही डरता है आदमी !! आदमी ही पाता है सारी दौलतें ख़ाक भी छाना करता है आदमी काम की ये बात तो करता ही है फ़ालतू बात भी करता है आदमी आती है मौत तो एक बार ही कई बार भी कभी मरता है आदमी दुनिया में वो 'जेहद' क्या कर नहीं सकता हौसलों से जो गुज़रता है आदमी !!           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार

सबको धमकी देकर वो धमकाया करता है..

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    #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 सबको धमकी देकर वो धमकाया करता है दुनिया की धड़कन को वो बढ़वाया करता है कैसा है वो, जिसको दोस्त बनाया करता है दुश्मन कह कर फिर उसको पिटवाया करता है दुनिया पर इल्ज़ाम तो वो लगवाया करता है लेकिन अपना जुर्म कहाँ दिखलाया करता है ऊपर से तो गीत मिलन के गाता फिरता है अंदर से लेकिन सबको लड़वाया करता है पागल लोगों के लड़ने पर हैरत कभी न करना पागल ही तो पागल से टकराया करता है !!  फ़ौजी ताक़त भी है ज़रूरी क्यों कि ज़माने में जंग लड़ने का दिन भी कभी तो आया करता है शोला शबनम, बिजली बारिश, आंधी और तूफ़ान मौसम भी क्या रंग हमें दिखलाया करता है !! अच्छा कुछ होते-होते और बुरा हो जाता है देखो ऐसा दिन भी कभी तो आया करता है वो बुल्डोजर भी और बिल्डर भी है वही 'जेहद' जिसको चाहे उजाड़ के वो बसवाया करता है !            #जावेेद_जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

कुछ ऐसा करो जनाब..

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  #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 कुछ ऐसा करो जनाब गुलशन हो शादाब !! किसी में आग नहीं कोई है बे-आब !! नैनों से पी लो गर न मिले शराब हर पल रहता है शायर दिल बेताब इक जाए तो दूजा फिर ले आए अज़ाब दहशत की दुनिया कब जाने हो ग़रक़ाब मस्ती में कोहराम उलझन में आदाब तू मेरी मैना मैं तेरा सुर्ख़ाब कब आएगा अपने क़दमों में महताब कुछ ऐसा लिखो 'जेहद' हो जाए जो नायाब !!           #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार

पल में हँसता-रोता हूँ..

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   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 पल में हँसता-रोता हूँ मैं भी जैसे बच्चा हूँ सुर-तालों पे खिलता हूँ मैं भी तो इक नग़मा हूँ मेरा लिखा या मुझको पढ़ मैं भी तो इक क़िस्सा हूँ उर्दू-हिंदी अपनी है मैं दोनों का अपना हूँ नींद उड़ी है बरसों से मैं जागा सा रहता हूँ प्यार की वादी से होके फिर घूम आया सहरा हूँ सुख-दुख और मोहब्बत का मिला-जुला इक नग़मा हूँ मुझको कौन डराएगा मैं तो रब से डरता हूँ सस्ती ख़ुशी है मेरी 'जेहद' ग़म का लेकिन मँहगा हूँ             #जावेेद_जेेेहद (जमशेद अख़्तर) करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

मेहर-ओ-वफ़ा की बात कहाँ अब..

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   #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मेहरो-वफ़ा की बात कहाँ अब प्यार की वो बरसात कहाँ अब दिन में है जब डर का डेरा चैन भरी फिर रात कहाँ अब प्यार की बैठे बात करें हम हैं ऐसे हालात कहाँ अब दिन तो कट गया उनसे मिलके गुज़रे गी ये रात कहाँ अब तुमसे मिलूँ मैं खुलके जानम इतनी मिरी औक़ात कहाँ अब दुनिया में शायर हैं अब भी अच्छे उनमें मगर वो बात कहाँ अब जिनका दिवाला निकल चुका है वो देंगे ख़ैरात कहाँ अब सब जिसकी इज़्ज़त करते हों ऐसी कोई भी ज़ात कहाँ अब बातें बहुत होती हैं लेकिन असली मुद्दे की बात कहाँ अब बस ज़ह्र उगलते रहते हैं उनमें भले कलमात कहाँ अब आज के ग़म में दिल है उलझा यादों की बारात कहाँ अब सब जिस पे भरोसा करते रहे वो भी सबके साथ कहाँ अब सच पूछो तो दुनिया में 'जहद' बस है मौत, हयात कहाँ अब           #जावेेद_जहद करन सराय, सासाराम, बिहार