इक हसीं से प्यार का तुम ख़ुशनुमा एहसास हो..

         ताज़ा ग़ज़ल

इक हसीं से प्यार का तुम ख़ुशनुमा एहसास हो
दूर होकर भी सनम तुम  कितने  मेरे  पास  हो

कैसे फिर रस्ता न देखूँ  मैं तुम्हारा हर घड़ी
आज तक टूटी नहीं जो तुम मिरी वो आस हो

आज भी तन्हाई में तुम ख़्यालों,ख़्वाबों में कभी
प्यार का नग़्मा लिए आ जाया  करते पास हो !!

आज तक दुनिया में मैं तो ज़िंदा हूँ बस इस लिए
मुझमें चलती रहती है जो, तुम ही तो वो सांस हो

देख कर तुमको सनम हो जाती है तबियत हरी
मेरी प्यासी ज़िंदगी की इक तुम्हीं तो प्यास हो !

कैसे मैं ये मान लूँ तुम हो सनम मुझसे अलग
मैं जो हूँ इक गुल अगर तो तुम मिरी बू-बास हो

क्या है मेरा हाल तेरे बिन सनम मैं क्या कहूँ
ख़ुद ही तुम ये जान लो, ख़ुद ही तो तुम हस्सास हो

काम कोई क्या करेगा वो बड़ा जग में 'जहद'
कुछ न कर पाएगा, जिसको ख़ुद पे न विश्वास हो
             जावेेद जहद

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