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शराब-ए-इश्क़ से मयकश अगर मख़मूर हो जाए..

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     #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 शराब-ए-इश्क़ से मयकश अगर मख़मूर हो जाए तो फिर मयख़ाने से उसकी तबीयत दूर हो जाए पिला ऐसी मुझे साक़ी वो जल्वा देख लूँ मैं भी नज़र जिस पर डालूँ वो सरापा हूर हो जाए !! चला हूँ गुल मोहब्बत का लिए मैं बज़्म-ए-जानाँ में ख़ुदावंदा, ये नज़राना उन्हें मंज़ूर हो जाए !! कि जीने का मज़ा सारा तो है जी हाथ में उसके वो चाहे तो हमारा दुख ही सारा दूर हो जाए !! अगर हम भाई-भाई हैं तो फिर ये दुश्मनी कैसी सुनो ऐ दोस्तो, अब ये हिमाक़त दूर हो जाए !! यही कमबख़्त हर आफ़त का बाइस दिल दिवाना है पटख़ दूँ जी में आता है कि चकनाचूर हो जाए !! 'जेहद' करते हो क्यों इतनी ख़ुशामद उस परी-रू की कहीं ऐसा न हो वो और भी मग़रूर हो जाए !!               #जावेेद_जेेेहद   Mob_ 9772365964

जिस दिल में तुम हो और तुम्हारा ख़याल है..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 जिस दिल में तुम हो और तुम्हारा ख़याल है वो आदमी तो यार बड़ा मालामाल है !! कुछ तेरा ख़्याल है मुझे, कुछ अपना ख़्याल है हम तुमको क्या सुनाएं, जो दिल में सवाल है ! फूलों में, चाँद तारों में, घर और दयार में हर सू परी-जमाल, तिरा ही जमाल है !! ऐ गुलबदन, तू दस्त-ए-करम से सँवार दे इक फूल रहगुज़र में पड़ा पायमाल है !! बादा-कशों को दीजिए न मय ये पूछ के है किसको ये हराम, ये किसको हलाल है हर वक़्त मौज-मस्ती का, रक़्स-ओ-सुरूर का तुझको जो ख़ब्त है ये जवानी की चाल है ज़ुल्फ़ें तराश ली हैं अब उसने तो इस तरह कुछ भी उलझना उसमें बहुत ही मुहाल है ख़ुशहाल हो गया है जहाँ पहले से अगर हर शख़्स किस लिए यूँ परेशान हाल है ? फ़ितना-फ़साद, राहज़नी और छल-कपट लेने न देंगे चैन तो जीना मुहाल है !! आया न देखने कभी जो जीते जी 'जेहद' मरकद पे मेरे किस लिए वो पुर-मलाल है           #जावेेद_जेेेहद_सहसरामी   Mob_ 9772365964

इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 इन पत्थरों से अपना भला दिल लगाए कौन इनके दिलों में फूल वफ़ा के खिलाए कौन ? आते नहीं गिरफ़्त में  ये तो असानी से इन दिलवरों को राह पे लाए तो लाए कौन माना बला की शोख़ी है  उनकी अदाओं में पर उस नदी की मौज में हरदम नहाए कौन जलती हुई मचलती शमा से लगा के दिल बैठे बिठाए मुफ़्त  जिया को जलाए कौन हम तो फ़िदा हैं उनके ही  हुस्न-ओ-जमाल पे इस रीत को ग़ज़ल में भला और निभाए कौन दो लड़कियों में एक ने  दिन का समय दिया इक ने कहा कि शब को पता मेरा पाए कौन तन्हाई, दर्द, आंसू, तड़प  और रतजगे इतने ग़म-ए-फ़िराक़ के सदमे उठाए कौन कितने अभी हैं छाए  ग़ज़ल के दयार में अब देखिए 'जेहद' यहाँ कबतक है छाए कौन              #जावेेद_जहद     Mob_ 9772365964

हो गया मालूम लाखों रंज-ओ-ग़म खाने के बाद..

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         #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 हो गया मालूम लाखों रंज-ओ-ग़म खाने के बाद ज़ह्न-ओ-दिल होता है रौशन और जल जाने के बाद कैसी-कैसी आफ़तों का सामना करना पड़ा इक तिरे मिलने से पहले, एक मिल जाने के बाद तेरी उलफ़त का सिला मिलता है क्या ऐ शम्मा-रू ये बता देते हैं परवाने भी जल जाने के बाद !! हुस्न है दो-रोज़ा इसपे कर न तू इतना घमंड क़द्र गुल की ख़त्म हो जाती है मुरझाने के बाद दर्द का आलम भी है और मौत का सामान भी जल्दी क्या है, जाइए गा दम निकल जाने के बाद ज़िंदगी से मौत को बेहतर न समझूँ क्यों भला खाएंगी न सैकड़ों चिंताएं मर जाने के बाद !! परदे की चीज़ों को परदे में ही रहना चाहिए क़द्र घट जाती है उसकी परदा उठ जाने के बाद मुझको समझाते जो थे शेर-ओ-सुख़न का क़ायदा ख़ुद हुए हैरान वो तो मेरे समझाने के बाद !! उनपे मरना ठीक है लेकिन 'जेहद' ये सोच ले उम्र भर रोना पड़ेगा उनपे मर जाने के बाद !!                 #जावेेद_जेेेहद         Mob_ 7992365964

वो कौन था जो ले गया अपने नगर मुझे..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 वो कौन था जो ले गया  अपने नगर मुझे वो कौन था जो दे गया ज़ख़्म-ए-जिगर मुझे दे कर ग़म-ए-जुदाई अबस उम्र भर मुझे दीवाना कर गया कोई  दीवाना-गर मुझे आवारगी-ए-शौक़ कहाँ और किधर मुझे क्यों ले चली है राह वहाँ  पुर-ख़तर मुझे दिल और दिमाग़ आज ठिकाने पे है नहीं बेचैन कर गई है किसी की नज़र मुझे !! कहती है उनकी तेग़-ए-जफ़ा दिल में बार बार दें गे दुआएं कितनी ये ज़ख़्म-ए-जिगर मुझे !! ऐ मेरे दिल के चैन ज़रा आके देखिए सहरा में चैन है न चमन में न घर मुझे मत आ ख़याल यार कि है वक़्त मौत का होने दे कुछ सुकून भी दम तोड़ कर मुझे उसने चली न चाल क़यामत की आजतक महशर का इंतजार हुआ  किस क़दर मुझे लिक्खा था साफ़ मैंने बुरा हाल है मिरा उसने दिया जवाब ज़हर भेज कर मुझे डूबा रहा 'जेहद' मैं  सुख़न में जो इस क़दर दुनिया में मिल ही जाएगी कुछ तो क़दर मुझे              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया

ऐ दिल दिवाने देख दुखी दिलरुबा न हो..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 ऐ दिल दिवाने देख दुखी दिलरुबा न हो आँखें हैं फ़र्श-ए-राह वही आ रहा न हो ऐसा भी प्यार दोस्तो किस काम का भला मैं हूँ असीर और उन्हें कुछ भी पता न हो देखा है इश्तियाक़ से उनका जमाल आज उनको भी ऐसा शौक़ कभी तो हुआ न हो पीना है गर तो देखना यारो शराब में साक़ी के दिल जिगर का लहू भी मिला न हो मुझको भी है ये आरज़ू ऐ जान-ए-मयकदा पी लूँ तिरी शराब मैं, फिर और क्या न हो उठ जाऊँ मैं यहाँ से अगर यूँ ही क्या हुआ वो कौन है, यहाँ से जो ख़स्ता गया न हो अज़मत-मआब, फ़िक्र-ए-जहाँ आप ही करें मेरा है क्या कि अपना यहाँ कुछ हो या न हो धोना है पाप मुझको भी इक अपना दोस्तो इसके लिए कहाँ मुझे जाकर नहाना हो ? उसकी भी मेहनतें भला किस काम की 'जेहद' मक़बूल सारी दुनिया में जिसकी कला न हो !!             #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, रोहतास, बिहार, इंडिया

मेरी वफ़ा को देख के उसपर भी वो जफ़ा करे..

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      #ताज़ा_ग़ज़ल 💐 मेरी वफ़ा को देख के उसपर भी वो जफ़ा करे ऐसे का कोई क्या करे,  दानिस्ता जो दग़ा करे उनके हिनाई हाथ से जिसको न गुल मिला करे ख़ामोश रह के वो सदा ख़ून-ए-जिगर पिया करे दो-चार दिन की बात हो तो करले कोई इंतज़ार मिलने के ऐतबार पर कबतक कोई जिया करे ढूंढा उसे है आँख ने, दिल ने उसे जगह दिया दोनों क़ुसूरवार हैं, दोनों की वो सज़ा करे !! चाहे सितम करे कोई, चाहे करम करे कोई लाज़िम है एक ही करे, जो भी करे सदा करे मरता हूँ तेरी चाह में, सुनके वो बोला नाज़ से मेरी बला को क्या ग़रज़, चाहे कोई मरा करे दुनिया का हर निज़ाम ही काफ़ी बिगड़ चुका 'जेहद' बर्बाद अब ये और हो, ऐसा न हो ख़ुदा करे !! मेरी ग़ज़ल को देख के शायद ये सोचते हों कुछ कब हो खिंचाई इसकी भी, बंदा ये कब ख़ता करे क़ातिल के रूबरू चला ये आरज़ू लिए 'जेहद' लौटे वो क़त्लगाह से, ऐसा न हो ख़ुदा करे !!              #जावेेद_जेेेहद करन सराय, सासाराम, बिहार, इंडिया