बस दौरे पे जो जाए तो लगता है कि तुम हो..

          ताज़ा ग़ज़ल 💐

बस दौरे पे जो जाए तो लगता है कि तुम हो
दौलत जो लुटा आए तो लगता है कि तुम हो

खींचे रहे सन्नाटा कभी और कभी ख़ूब
पागल सा जो चिल्लाए तो लगता है कि तुम हो

साधू की तरह बनके सियासत की गली में
इक आँख जो मटकाए तो लगता है कि तुम हो

जो काम ज़रूरी है वही सत्ता में आके
जो शख़्स न कर पाए तो लगता है कि तुम हो

करता रहे ग़लती जो, डुबाता रहे नइया
फिर भी नहीं पछताए तो लगता है कि तुम हो

पानी में मचलती हुई मछली जो हवा में
लहरा के उछल जाए तो लगता है कि तुम हो

उल्फ़त की कहानी में किसी पल जो अचानक
मौसम सा बदल जाए तो लगता है कि तुम हो

पैमाना शराबों से भरा ख़ूब लबालब
आपस में जो टकराए तो लगता है कि तुम हो

जो कहना नहीं चाहिए वो सब भी ग़ज़ल में
जो कहता चला जाए तो लगता है कि तुम हो

बकबक करे हर वक़्त 'जहद' फिर भी मगर जो
कुछ बात छुपा जाए तो लगता है कि तुम हो ।।

         ~जावेद जहद

Comments

Popular posts from this blog

जब बुरे दिन उमड़ने लगते हैं..

न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..

जावेद जहद की पाँच ग़ज़लें..