करो या ना करो जानम कोई सिंगार होली में..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
करो या ना करो जानम कोई सिंगार होली में
लगा के रंग हो जाना हसीं तुम यार होली में
ये रंगों का परब है जी कि इसके बिन मज़ा कैसा
उड़ा के रंग कर दो सारा जग गुलज़ार होली में ।
ग़ज़ल होली पे कहनी हो तो उसमें रखना बस ये ख़्याल
कि पूरा होली जैसा हो ग़ज़ल का सार होली में ।।
ग़ज़ल क्या सुनते हो होली में यारो फीकी-फीकी सी
बजाओ गाना देवर-भौजी का झंकार होली में ।।
मनाओ मौज-मस्ती, झूमो-नाचो चाहे जितना भी
करो पीकर किसी से तुम न लेकिन मार होली में
लड़ें तो लड़ने दो आँखें, चढ़ें तो चढ़ने दो आँखें
जिगर के पार हो आँखों की ये तलवार होली में
'जहद' घूमो-फिरो, सबसे मिलो तुम आज हँस-हँस के
रहो घर में पड़े तुम ऐसे ना बीमार होली में ।।
~जावेद जहद
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