कि दिल में मिरे जो भी घर कर गया..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐
बहरे मुतकारिब मुसम्मन मक़सूर
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़अल
122  122  122  12

कि दिल में मिरे जो भी घर कर गया
समझिए कि मुझको वो सर कर गया

रसीला था इतना ही उसका वजूद
कि छूते ही मुझको वो तर कर गया

ये कैसे बताएं कि इक मेहरबां
हमारी वो क्या-क्या नज़र कर गया

वो आया था दिल को बिछाए मगर
गया तो वो तेढ़ी नज़र कर गया ।।

जहाँ से कभी भी मैं गुज़रा न ख़ुद
वहाँ भी वो मुझ में गुज़र कर गया

वफ़ा, प्यार, उल्फ़त के वो साथ ही
मुलाक़ात भी मुख़्तसर कर गया ।

भला इश्क़ जितना है उतना बुरा
मुझे उनका ग़म ये ख़बर कर गया

वो कैसा था इंसाफ़ वाला भी जो
इधर की अमानत उधर कर गया

'जहद' अब यहाँ तो हैं बैचैनियाँ
कि अच्छा है जो भी सफ़र कर गया

     ~जावेद जहद

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