न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है..
ताज़ा ग़ज़ल
न पूछो ग़ज़ल से मुझे क्या मिला है
कि इसने मुझे फ़िक्र से भर दिया है
मिरा देवता भी अजब देवता है
वो मुझको बिठा कर मुझे पूजता है
बहुत रोज़ से ये ग़ज़ल कहते-कहते
लो मैंने भी ख़ुद को गुरू कर लिया है
नशे की कोई चीज़ लेता नहीं मैं
हूँ फिर क्यूँ नशे में, मुझे क्या हुआ है
सिवा दर्द-ओ-ग़म के, मुसीबत, अलम के
यहाँ और क्या है, यहाँ और क्या है ??
भुला बैठी दुनिया कि करना है क्या-क्या
यही तो वजह कुछ का कुछ हो रहा है !!
है किसको पता होने वाला है कल क्या
कि ये राज़ तो बस ख़ुदा जानता है !!
कभी सुख, कभी दुख, कभी कुछ, कभी कुछ
कि जीवन-कथा का यही तो मज़ा है !!
ग़ज़ल को हसीं से हसीं करते-करते
बहुत शायरी को हसीं कर लिया है !
किसी बज़्म में ये तो जाता नहीं है
'जहद' भी तो शायर अजब सरफिरा है
~ जावेद जहद
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