हमें भी प्यार करने की ज़रूरत है ज़रूरत है..

         ताज़ा ग़ज़ल 💐

हमें भी प्यार करने की ज़रूरत है ज़रूरत है
तुम्हें भी हम पे मरने की ज़रूरत है ज़रूरत है

कि जो इंसाफ़ करते हैं, चलाते हैं जो सरकारें
उन्हें भी तो सुधरने की ज़रूरत है ज़रूरत है

पुराने सारे झगड़ों से, कि शिकवों से शिकायत से
हमें अब तो उबरने की ज़रूरत है ज़रूरत है ।।

ज़मीं छत ही नहीं यारो, मकां के सारे खम्भों को
सँवरने की, निखरने की ज़रूरत है ज़रूरत है ।।

तकब्बुर की बुलंदी से, घमंडों के मिनारों से
अरे नादाँ उतरने की ज़रूरत है ज़रूरत है ।

हैं डूबे जो अँधेरों के बहुत गहरे समंदर में
उजालों में उभरने की ज़रूरत है ज़रूरत है

नहीं जो ज़ख्म भरते हैं किसी सूरत उन्हें भी तो
किसी भी तरहा भरने की ज़रूरत है ज़रूरत है

अगर जब दोनों दोषी हों, मगर इक दूजे को कोसें
तो क्या इंसाफ़ करने की ज़रूरत है ज़रूरत है ।।

ये थोड़ी-थोड़ी तबदीली से होगा क्या ज़माने में
'जहद' सब स्वच्छ करने की ज़रूरत है ज़रूरत है

          ~जावेद जहद

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