दिलनशीं दिलरुबा था नाम उसका..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
दिलनशीं दिलरुबा था नाम उसका
दिलों को लूटना था काम उसका
जितने भी जाँ-निसार थे उसके
उनको मिलता रहा पयाम उसका
फिर तो कितने ही लोग दौड़ पड़े
भरके छलका जो ख़ूब जाम उसका
उसपे मँडराते बाज़ रहते थे
क्या पता कैसा था वो बाम उसका
वो रईसों के दिल की रानी है
चंद सिक्का मगर इनाम उसका
दिन तो उसका सुकूँ से कटता है
रात ग़ारत करे अराम उसका !!
वो सभी की है उसका कोई नहीं
कोई लेता न हाथ थाम उसका !
जो बिखर जाए सुब्ह होते 'जहद'
घर हो आबाद फिर वो शाम उसका
~जावेद जहद
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