कम न हुए हैं कुछ भी तो दर्द-ओ-अलम अभी..

          ताज़ा ग़ज़ल 💐

कम न हुए हैं कुछ भी तो दर्द-ओ-अलम अभी
जग में भरे हुए हैं जी  ज़ुल्म-ओ-सितम अभी

महफ़िल से, भीड़-भाड़ से सब दूर ही रहें
ये वायरस तो कर रहा बिस्फोट बम अभी

बढ़ती ही जा रही हैं हमारी मुसीबतें
शायद रहेगा जारी ख़ुदा का सितम अभी

कितने मज़े से घर में पड़े करते प्यार हम
लेकिन न जाने है कहाँ मेरा सनम अभी

समझेगा किस तरह वो कि होता है प्यार क्या
रक्खा है राह-ए-इश्क़ में उसने क़दम अभी !!

हम पे किया है तूने बहुत ही करम मगर
हम पे ख़ुदाया और हो रहमो-करम अभी

अपनी तो यारो कुछ भी नहीं हैं ये शोहरतें
लाखों निसार होंगे ख़ुदा की क़सम अभी !

छोड़ो सियासतें न लड़ो इस घड़ी 'जेहद'
सबको बचाने में ही लगाना है दम अभी

         ~जावेद जहद

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