या ख़ुदा, कैसी ये बला आई..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
या ख़ुदा, कैसी ये बला आई
हर तरफ़ मौत बनके है छाई
घिर गईं कैसे ये अँधेरों में
सारी दुनिया की सारी रानाई
हर तरफ़ दर्द-ओ-ग़म है, मातम है
ढोल बजता कहीं न शहनाई !!
क्या पता क्या ख़ता हुई हमसे
कैसे जुर्मों की है सज़ा पाई !!
अब हवा भी भली नहीं लगती
कैसी पछिया रे कैसी पुरवाई
चल रहा था बहुत दिनों से खेल
शक्ति से शक्ति अब है टकराई !
हम वफ़ा ख़ुद ही उससे कर न सके
क्या हुआ, वो हुआ जो हरजाई !!
मैं तो उस्ताद ख़ुद को कहता नहीं
लोग समझें तो क्या करूँ भाई !!
आपदा है बहुत बड़ी ये 'जहद'
मिलके इमदाद सब करो भाई
~जावेद जहद
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