कहाँ से आ गई ये ज़िंदगी में बेचैनी..

         ताज़ा ग़ज़ल 💐

कहाँ से आ गई ये ज़िंदगी में बेचैनी
दिखाई देती है अब हर किसी में बेचैनी

दिलों में चैन-ओ-सुकूँ भरदे मेरे या अल्लाह
वगरना होगी तिरी बंदगी में बेचैनी ।।

सुकून-ओ-चैन, मुसर्रत, ख़ुमार, मदहोशी
ये अच्छी होती है या शायरी में बेचैनी ?

क़सम से देखी नहीं इतनी तो कभी मैंने
बढ़ी है जितनी सियासतगरी में बेचैनी ।

हमारी एकता चैन-ओ-सुकून देती है
कभी न आए कोई इस गली में बेचैनी

जुदा वो होके मिरा चैन ले गए आख़िर
यहाँ भी आ गई लो आशिक़ी में बेचैनी

जहाँ नहीं थी वहाँ भी ये आज आ पहुंची
हर इक की बात में, आंसू, हँसी में बेचैनी

ज़रा सी ठीक है लेकिन 'जहद' बहुत ज़्यादा
कभी न आए किसी ज़िंदगी में बेचैनी !!

         ~जावेद जहद

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