किसी अपने से या पराए से, कभी भी किसी से तू प्यार कर..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
किसी अपने से या पराए से, कभी भी किसी से तू प्यार कर
तो बड़े ही जोश-ओ-ख़रोश से, बड़ी ख़ुशदिली से तू प्यार कर
किसी को समझ ज़रा न बुरा, सभी को तू अच्छी नज़र से देख
है बड़ी ही अच्छी ये बंदगी, ये भी बंदगी से तू प्यार कर ।।
बुरा क्या है प्यार निभाने में, बुरा क्या है नेकी कमाने में
हैं ख़ुदा की जितनी भी ख़ल्क़तें, सभी से सभी से तू प्यार कर
तिरे पास जो भी अज़ीज़ हैं, उन्हें चाहे जितना तू प्यार दे
हैं जो दूर रहते इधर-उधर, उन्हें भी सही से तू प्यार कर ।
तू अँधेरों का भी पुजारी है, तू उजालों का भी पुजारी है
ये तो पाप है, तू अँधेरों से या तो रौशनी से तू प्यार कर
मैं बना-बना के लुटाऊँगा कई शेर रोज़ ज़माने में
मुझे दे न दे कोई अहमियत, मिरी शायरी से तू प्यार कर
ज़रा ग़ज़लों में रहे नग़मगी, रहे लय बनी सभी शेर की
सभी गाते भी हैं इसे 'जेहद', फ़न-ए-मौसिक़ी से तू प्यार कर
~जावेद जहद
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