जुदाई में उनकी मज़ा और भी है..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐

जुदाई में उनकी मज़ा और भी है
ये दिल उनपे होता फ़िदा और भी है

वो जाते हैं जितना अधिक दूर हमसे
ये दिल उनमें रहता लगा और भी है

मोहब्बत का दुनिया में तन्हा नहीं है
ज़माने में ऐसा नशा और भी है ।।

ख़ुदा जाने सुधरे गी कब अपनी हालत
अभी दूर शायद शिफ़ा और भी है ।।

अभी मर्ज़ बढ़ता ही तो जा रहा है
अभी दर्द से दिल घिरा और भी है

अभी रुकने वाला सितम ये नहीं है
अभी ज़ुल्म का सामना और भी है

न जाने ज़माना कब आएगा अच्छा
ज़माना तो ये कुछ बुरा और भी है

बुराई का दलदल तो ऐसा है दलदल
गिरा इसमें जो भी फंसा और भी है

गधा जो समझता है हुशयार ख़ुद को
तो समझो गधा वो गधा और भी है !

वो छुप-छुप के करते थे हमले मगर अब
खुले ज़ुल्म का सामना और भी है ।।

थी उम्मीद जितनी हुई न तरक़्क़ी
हाँ पस्ती में सबकुछ गया और भी है

'जहद' हो गई कुछ ख़ता ऐसी-ऐसी
जहाँ हमपे अबके हँसा और भी है ।

       ~जावेद जहद

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