तेरी गली की सैर कराता रहा मुझे..
ताज़ा ग़ज़ल 💐
बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब मकफ़ूफ़
मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन
221 2121 1221 212
तेरी गली की सैर कराता रहा मुझे
वो तेरा प्यार था जो बुलाता रहा मुझे
तेरे हसीं ख़्याल का वो तो कमाल था
घर बैठे जो बहिश्त दिखाता रहा मुझे
पाया नहीं किसी भी तो महफ़िल दयार में
तेरी गली में लुत्फ़ जो आता रहा मुझे !!
इक भूक प्यास थी वो या कोई सेहर था वो
तेरी तरफ़ जो खींच के लाता रहा मुझे !!
हर बार हर मिलन मेंं तिरा जलवा जादुई
क्या क्या अजीब रंग दिखाता रहा मुझे
घुल-मिल गया था मुझसे मिरा यार इस क़दर
हर एक बात अपनी बताता रहा मुझे !!
वो चाहता था मैं रहूं होश-ओ-हवास में
पर वो दिवाना और बनाता रहा मुझे !!
वो हो गया था हावी मिरे दिल पे इस क़दर
जिस तर्ह जी में आया नचाता रहा मुझे !!
कहता कोई किसी पे लुटा दे तू ज़िंदगी
दिल ना लगाना कोई बताता रहा मुझे
वो चाहता था जितनी ही बर्बादियाँ मिरी
उसका सितम तो और बनाता रहा मुझे
मुझको बनाके अब्र सा पागल हवा का वो
झोंका कहाँ-कहाँ न उड़ाता रहा मुझे !!
वो चाहता था मुझको बनाना तो और कुछ
मेरा जुनूँ कुछ और बनाता रहा मुझे !!
बे-अक़्ल, बे-शऊर कभी मैं भी था 'जहद'
इक यार होशियार बनाता रहा मुझे !!
~जावेद जहद
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