बहारों का दिलकश समां ढूंढते हैं..

     ताज़ा ग़ज़ल 💐

बहारों का दिलकश समां ढूंढते हैं
कि हम ख़ुशनुमा गुलसितां ढूंढते हैं

है अपना जहाँ सबसे प्यारा तो फिर क्यों
कोई दूसरा हम जहां ढूंढते हैं ?

कहीं मह्ल कितने ही वीरां पड़े हैं
कहीं लोग बस इक मकां ढूंढते हैं

जो मुझपे फ़िदा हो, करे मेरी पूजा
अब अरमां मिरे वो बुतां ढूंढते हैं !

भरा प्यार ही प्यार हो जिस जगह पर
चलो एक ऐसा जहां ढूंढते हैं !!

झुलसती है जब भी किसी दिल की बस्ती
न जाने सभी क्यों धुआं ढूंढते हैं !!

कहीं लोग नफ़रत सी फैला रहे हैं
कहीं लोग अम्न-ओ-अमां ढूंढते हैं

'जेहद' क्या ज़माना हमें दर्द देगा
कि हम दर्द का ही जहां ढूंढते हैं

    ~जावेद जेहद

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