कोई इस तरह मेरे पास आरहा है..

      ताज़ा ग़ज़ल 💐

कोई इस तरह मेरे पास आरहा है
कि सीने से दिल ये चला जारहा है

नशीली निगाहों का साग़र छलक के
मिरे दिल को देखो न बहका रहा है

जवाँ दो दिलों का ये पहला मिलन है
समाँ जैसे सारा ही थर्रा रहा है !!

महकने लगी है कली फूल बनके
फ़लक उसपे शबनम सी बरसा रहा है

चलो आज सुनते हैं चुपके से यारो
ग़ज़ल कोई मेरी छुपा गा रहा है !!

ये पल तो 'जेहद' कोई आफ़त करेगा
कि इस पल नज़र कोई टकरा रहा है

     ~जावेद जेहद

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